Wednesday, December 21, 2016

मधेशवानी....!!!!!!

एक बार फिर नेपाल देश कठिनाईयों के दौर सा गुज़र रहा है.संविधान बनने के बाद भी कुछ समुदाय संविधान के विरुद्ध संघर्ष कर रहे हैं.पिछले वर्ष चार महीने की आर्थिक बंदी सहने के बाद एक बार फिर नेपाल में आमजीवन असामान्य नज़र आने लगा है.ऐसा महसूस होता है की नेपाली जनता एक बार फिर तहस नहस का शिकार होने वाली है. पूरा देश कुछ लोगों के मन के अनुसार जीवन गुज़ारने पर मजबूर है.कुछ राजनेताओं के रहम-व-क्रम पर इस देश का भविष्य निर्भर दिखाई पड़ता है.एक बार फिर मधेसी नेता झूठ और मक्कारी का सहारा ले कर मासूम जनता को बेवकूफ बना रहे हैं.अपने नापाक और देश विरुद्ध नीति में असफल रहने के बाद दोबारा इसको सफल बनाने की कोशिश फिर से शुरू की जा रही है.ता.मा.लो.पा. अध्यक्ष श्री महंत ठाकुर का कपिलवस्तु दौरा और जगह जगह जनसभा करके मदद की गुहार लगाना इसका पुख्ता सुबूत है.दलित और जनजाति समुदाय के नाम का परंपरागत प्रयोग इनके जनसभाओ का अंग बनता दिखाई पड़ रहा है.हालाँकि अक्सर मधेशी पार्टियाँ ब्रहमनवादी विचारधारा रखती हैं. लेकिन वोट के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले ये मधेसी नेता दलित,थारू और जनजाति के नाम का खूब प्रयोग कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि ये लोग ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं.संविधान संशोधन एकमात्र राजनितिक विकल्प बचने के कारण मधेसी पार्टियाँ इसको लेकर कुछ भी करने को तय्यार हैं . हकीकत ये है कि अगर संशोधन बिल न पास हुआ तो मधेसी पार्टियाँ भी मधेस से नापास कर दी जाएँगी.इसीलिए इनकी राजनीती का आखिरी सहारा यह संशोधन विधेयक ही है.इसी कारण एक बार फिर मधेसी जनता डर के आगोश में है.क्यूंकि आगे देश का क्या कुछ होने वाला है इसको लेकर आमजनता असमंजस में है.उसे कुछ समझ में नहीं आरहा है.जावेद आलम खान

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