अगर इमानदारी के साथ मधेशी समस्याओं पर विचार विमर्श किया जाये तो यह हकीकत
में नेपालियों की कोई समस्या नहीं लगे गी. यह पैदा की हुई ऐसे परेशानी है जिसका
परिणाम बहुत भयानक है.इस समस्सया का समाधान भी समस्सया उत्पन्न करने वालों के पास
ही मौजूद है.लेकिन वह समाधान नहीं चाहते हैं बल्कि देश चाहते हैं.....हाँ....पूरे
देश पर क़ब्ज़ा स्थापित करना चाहते हैं. यह एक सपना है जो कभी पूरा हो ही नहीं सकता.
मधेसी समस्सया भारतीय विस्तारवादी नीति का एक अंग है. भारत ही इस भयानक स्थिति का ज़िम्मेदार है. नेपाल की राजनितिक विफलता और अशांति भारतीय विदेशी नीति का ही देन है. भारत अपने कई नीतियों को नेपाल देश पर थोपना चाहता है.कई वर्षों से वह इस चाल को कामयाब बनाने में लगा पड़ा है. लेकिन अभी तक वह किसी हद तक भी कामयाब न हो सका है. इसकी वजह नेपाली नागरिकों की देशभक्ति है.
आज नेपाल में जो कुछ मधेश के समस्सयाओं पर बात की जा रही है वह वास्तव में मधेशी समस्सया नहीं है बल्कि यह भारतीय विस्तारवादी की समस्सया है. हकीकत यह है की भारत मधेशियों को इस्तेमल कर नेपाल के तराई क्षेत्र को नेपाल से अलग करके एक और सिक्कम बनाना चाह रहा है. इसी विस्तारवादी आवश्यकता अनुसार मधेसी संविधान संशोधन कराना चाह रहे हैं. जो शायद असंभव है. क्यूंकि कोई भी देश ऐसी नीति कभी भी नहीं ला सकता जिससे उसके देश के वजूद को ही खतरा हो.
भारत एक बार फिर अपने नापाक इरादों को जन्म दे रहा है. वह सरदार बल्लभ भाई पटेल की नीति को लागू करना चाह रहा है.विस्तारवादी नीति बल्लभ भाई पटेल का ही देन है. वह हमेशा नेपाल देश को भारत में शामिल करने का इरादा रखते थे. बहुत हद तक वह इसमें कामियाब भी हुए है. क्यूंकि भारत में बहुत सारी जगहें ऐसी हैं जो सौ सालों के अन्दर ही नेपाल हुआ करता थी. भारतीय विस्तारवादी नीति का नमूना देखना है तो आप सिक्कम का इतिहास पढ़ सकते हैं. इस नीति के अंतर्गत भारत नेपाल में बहुत कुछ कर चूका है. अब वह तराई और पहाड़ को अलग करके तराई को नेपाल से अलग कर देना चाहता है. भला आप ही सोचिये नेपाल ऐसे नीतियों का समर्थन कैसे कर सकता है.
आजतक नेपाल में भारतीय विस्तारवादी नीति कैसे कामयाब रही...??? इस के ज़िम्मेदार नेपाल के राजनीतिक दल और राजनेता भी है. नेपाल के राजनितिक दलों में जिस प्रकार नीतिगत कमज़ोरी पाई जाती है उसकी वजह से भारतीय विस्तारवादी नीति को शक्ति मिलती रही है. इसको अति शक्ति प्रदान करने में मधेश्वादी भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है. इन्हीं कारण आज नेपाल के राष्ट्रीयता को गंभीर खतरा है. प्रदेश नम्बर पांच का विखंडन इसी नीति को विस्तार देने का एक छोटा सा प्रयास है.जो सिर्फ तराई के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए भयानक खतरा है.