जहाँ यह #बारिश #किसानों के मुसकान का कारण बनी है तो वही #कृष्णनगर_वासियों के लिए मुसीबत बनती नज़र आ रही है.#बेहाल_शहर एक बार फ़िर से #परेशानहाल दिख रहा है.लोग अपने-अपने स्तर से बर्बादी का रोना रो रहे हैं.
6 घंटे बारिश के बाद ही पूरे शहर में #पानी का #जमाव शुरू हो चुका है.कई घर चपेट में आ चुके हैं.खुद नगरपालिका खतरे के निशान पर है.
ये इस शहर के लिए कोइ नयी बात नहीं है.पिछले 3 सालो से ये समस्या पूरी बारिश सरदर्द बना रहता है.जब स्थानीय चुनाव हुआ तो लोगों ने #जनप्रतिनिधियों के द्वारा कुछ #निपटारे की उम्मीद की.
लेकिन साल गुज़र गया.ये लोग कमीशन कहाँ से कितना मिलेगा इसी विषय पर माथापच्ची करते रहे.बेशुमार मीटिन्ग हुई लोग आते रहे और भत्ता खाते रहे.कभी किसी ने जनता के परेशानियो पर चर्चा नहीं किया.कभी भी किसी meeting में कृष्णनगर के मौजूदा हालात की चर्चा नहीं हुई.
#मेरा_सवाल दो तिहाई #बहुमत के नारे लगाने वालों से ये है कि क्या आप लोगों ने पूरे साल में एक बार भी इस विषय पर चर्चा करने के लिए meeting की ?? कभी मेयर साहब ने जनप्रतिनिधियों और एक्स्पर्टस से ये जानने की कोशिश की कि कैसे इस परेशानी से उभरा जा सकता है?? शायद कभी इनलोगों को इस संवेदनशील मुद्दे पर बात करने की ज़रूरत महसूस हुई ही नहीं.
होना तो ये चाहिए था कि मेयर साहब इसके लिए एक कमेटी गठन करते.वे लोग एक रिपोर्ट तैयार करते कि कृष्णनगर शहर में पानी का जमाव कैसे रोका जाए..??
इस भीषण परेशानी से बचने के लिए किस तरह का उपाय किया जाए?? लेकिन ये ज़रूरी काम करने के लिए हमारे जनप्रतिनिधियों के पास समय कहाँ है.
बात साफ़ ये है कि ये नगरपालिका बिना किसी vision(दृष्टि) के जैसे-तैसे कुछ खास लोगों के निजि vision पर चल रहा है.
#इसी_लिए_कहा_जाता_है_कि_वोट_सोच_समझ_कर_डालो.
ये इस शहर के लिए कोइ नयी बात नहीं है.पिछले 3 सालो से ये समस्या पूरी बारिश सरदर्द बना रहता है.जब स्थानीय चुनाव हुआ तो लोगों ने #जनप्रतिनिधियों के द्वारा कुछ #निपटारे की उम्मीद की.
लेकिन साल गुज़र गया.ये लोग कमीशन कहाँ से कितना मिलेगा इसी विषय पर माथापच्ची करते रहे.बेशुमार मीटिन्ग हुई लोग आते रहे और भत्ता खाते रहे.कभी किसी ने जनता के परेशानियो पर चर्चा नहीं किया.कभी भी किसी meeting में कृष्णनगर के मौजूदा हालात की चर्चा नहीं हुई.
#मेरा_सवाल दो तिहाई #बहुमत के नारे लगाने वालों से ये है कि क्या आप लोगों ने पूरे साल में एक बार भी इस विषय पर चर्चा करने के लिए meeting की ?? कभी मेयर साहब ने जनप्रतिनिधियों और एक्स्पर्टस से ये जानने की कोशिश की कि कैसे इस परेशानी से उभरा जा सकता है?? शायद कभी इनलोगों को इस संवेदनशील मुद्दे पर बात करने की ज़रूरत महसूस हुई ही नहीं.
होना तो ये चाहिए था कि मेयर साहब इसके लिए एक कमेटी गठन करते.वे लोग एक रिपोर्ट तैयार करते कि कृष्णनगर शहर में पानी का जमाव कैसे रोका जाए..??
इस भीषण परेशानी से बचने के लिए किस तरह का उपाय किया जाए?? लेकिन ये ज़रूरी काम करने के लिए हमारे जनप्रतिनिधियों के पास समय कहाँ है.
बात साफ़ ये है कि ये नगरपालिका बिना किसी vision(दृष्टि) के जैसे-तैसे कुछ खास लोगों के निजि vision पर चल रहा है.
#इसी_लिए_कहा_जाता_है_कि_वोट_सोच_समझ_कर_डालो.